Essay On Bhagat Singh In Hindi

essay on bhagat singh in hindiDear Student’s, आज के इस Essay में हम पड़ेगे Essay On Bhagat Singh in Hindi के बारे में. शहीद भगत सिंह कोन थे और भारत देश के लिए सरदार भगत सिंह ने कैसे अपना बलिदान दिया. उनका आजादी में क्या योगदान रहा व उनके सम्पूर्ण जीवन का परिचय और संघर्ष के बारे में जानकारी देगे. Essay On Bhagat Singh यानि की शहीद भगत सिंह पर निबंध कैसे शहीद भगत सिंह ने अपने जीवन का बलिदान देकर देशवासियों में आजादी के लिए क्रांति की एक लहर पैदा कर दी थी.

Covering Topics – Essay On Bhagat Singh In Hindi – सरदार भगत सिंह पर निबंध.

  • Introduction Essay On Bhagat Singh – शहीद भगत सिंह निबंध पर प्रस्तावना.
  • Who Was sardar Bhagat Singh – सरदार भगत सिंह कोन थे?
  • Bhagat Singh Childhood and Education – सरदार भगत सिंह का बचपन और शिक्षा
  • Movement By Bhagat Singh – शहीद भगत सिंह दुआरा चलाये गये आंदोलन.
  • Essay On Sardar Bhagat Singh Conclusion In Hindi – सरदार भगत सिंह निबंध पर निष्कर्ष.
  • Precious Thoughts of Shahid Bhagat Singh – सरदार भगत सिंह के अनमोल विचार.
  • Essay on Bhagat Singh In Hindi (300 Word) – सरदार भगत सिंह पर निबंध हिंदी में (300 शब्द)
  • Essay on Bhagat Singh In Hindi (500 word) – सरदार भगत सिंह पर 500 शब्दों का निबंध हिंदी में.

दोस्तों, सरदार भगत सिंह का नाम अमर शहीदों में और क्रांतिकारियों में सबसे पहले गिना जाता है। गुलाम देश की आज़ादी के भगत सिंह ने अपनी जवानी तथा सम्पूर्ण जीवन देश के नाम लिख दिया. और हमारे देश को गुलामी की बेडियो से आजाद कराया. शहीद भगत सिंह उन्ही में से एक है जिन्होंने अपना पूरा जीवन हमारे देश के लिए न्योछावर कर दिया था.

शहीद भगत सिंह ने इस देश को आजाद कराने के लिए बहुत ऐसे काम किए है. भगत सिंह ने केवल जीवित रहने पर ही नहीं अपितु शहीद होने के बाद भी देश की आजादी के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. अपने शौर्य और बलिदान से हमारे देश को नोजवानो में देश की आजादी के लिए क्रन्तिकारी की भावना पैदा कर दी थी. अब हम आपको यहाँ पर सरदार भगत सिंह पर निबंध में उनके बारे में पूरी जानकारी देगे. तो चलिए आइये पड़ते है Essay On Bhagat Singh In Hindi यानी कि शहीद भगत सिंह पर निबंध.

Introduction Essay On Bhagat Singh और सरदार भगत सिंह निबंध पर प्रस्तावना

सरदार भगत सिंह, जिन्हें हम शहीद भगत सिंह के नाम से भी जानते है, जिन्होंने एक बेहतर स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में कोई कसर नही छोड़ी थी | उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों में से एक माना जाता है.

भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 में पंजाब के सिख परिवार में हुआ था | उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह था और उनकी माता का नाम विधावती कौर था | उनके पिता और चाचा सहित उनके परिवार के कई सदस्य भारतीय स्वतंत्रता के संघर्ष में सक्रीय रूप से शामिल थे | उनका परिवार और उस दौरान हुई कुछ घटनाएँ भगत सिंह के लिए एक प्रेरडा थी जिसके कारण वह जल्द से जल्द आजादी की लड़ाई में उतर गए थे |

उनके जीवन की बारी स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की हत्या के बाद भगत सिंह इस अन्याय को सहन नहीं कर सके और लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने की कोशिश करने लगे। उन्होंने ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉन्डर्स को मारने और केंद्रीय विधान सभा में बम फेंकने की योजना बनाई थी।

भारत आज भी उनके द्वारा किए गये कार्यो का ऋणी है. हमारे देश में आज भी उनका नाम आदर सत्कार के साथ लिया जाता है. और उनको याद करने के लिए हम आज भी गाने पर उनके विचारो को दोहराते है जैसे:-

डरे न कुछ भी जहां की चला चली से हम।

गिरा के भागे न बम भी असेंबली से हम।

उड़ाए फिरता था हमको खयाले-मुस्तकबिल,

कि बैठ सकते न थे दिल की बेकली से हम।

हम इंकलाब की कुरबानगह पे चढ़ते हैं,

कि प्यार करते हैं ऐसे महाबली से हम।

जो जी में आए तेरे, शौक से सुनाए जा,

कि तैश खाते नहीं हैं कटी-जली से हम।

न हो तू चीं-ब-जबीं, तिवरियों पे डाल न बल,

चले-चले ओ सितमगर, तेरी गली से हम।

Who Was Bhagat Singh – सरदार भगत सिंह कोन थे

शहीद भगत सिंह एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रेरणादायक आइकन थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रीय आंदोलन को एक नई दिशा दी।

शहीद भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायलपुर जिले की बंगाणा, जारणवाला तहसील (जो अब पाकिस्तान में है) में एक देशभक्त पिता सरदार किशन सिंह के घर हुआ था, जो भगत सिंह के जन्म के समय भी जेल में थे | भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे | जिन्होंने इंडियन पेट्रीयेट्स एसोसिएशन की नीब डाली|

इस प्रकार, देशभक्ति शहीद भगत सिंह के खून में थी. वह कई क्रांतिकारी संगठनों से जुड़े थे और इन्होने भारतीय रास्ट्रवादी आन्दोलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उन्हें अक्सर “शहीद भगत सिंह” के रूप में बुलाया जाता है. क्योकि इस महान स्वतंत्रता  सेनानी के समर्थको और अनुयायियों ने उन्हें रास्ट्र के लिए अपना जीवन बलिदान करने के बाद “शहीद” का अर्थ “शहीद” दिया| वह वर्ष 1928 में “हिंदुस्तान सोशल रिपब्लिकन एसोसिएशन” के एक प्रमुख नेता बने.

Shahid Bhagat Singh Childhood and Education – सरदार भगत सिंह का बचपन और शिक्षा

वह एक महान व्यक्ति थे उनका जन्म सिख्खों के परिवार में हुआ था | भगत सिंह के पिता और चाचा ग़दर पार्टी का स्थाई हिस्सा थे. इसलिए भगत सिंह के जन्म के दौरान, उनके पिता और चाचा कुछ क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लेने के कारण जेल में थे.

शहीद भगत सिंह की प्राथमिक शिक्षा 5 वीं कक्षा तक एक स्थानीय गावं के स्कूल से पूरी हुई और फिर उनके पिता ने उन्हें दयानंद एंग्लो-वैदिक हाई स्कूल (आर्य समाजी नाम) में दाखिला दिलाया. उन्होंने अपने ही पिता और चाचाओ से प्रेरित होकर देशभक्त होने का फेसला किया.

शहीद भगत सिंह कम उम्र में असहयोग आन्दोलन में शामिल हो गए थे जो महात्मा गाँधी द्वारा शुरू किया गया था. उन्होंने अपना स्कूल भी छोड़ दिया था और लाहौर में नेशनल कॉलेज में दाखिला लिया. वह युवा क्रांतिकारी आन्दोलन में भी शामिल हुए और भारत में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लड़ाई सुरु कर दी. वे प्रेरित हुए और 1923 में लाहौर के नेशनल Collage में शामिल हो गए.

इसके अलावा वह हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन में शामिल हो गए है. चंद्रशेखर आजाद, शाहिद अशफाकल्लाह खान, और राम प्रसाद बिस्मिल जैसे कई मेहनती और प्रमुख नेता भी इस आन्दोलन में शामिल थे. जब उनके माता-पिता उनकी शादी करने की योजना बना रहे थे, वह B.A कर रहे थे और इस प्रकार, उनकी शादी की योजना को अस्वीकार कर दिया.

वह युवा रास्ट्रीय आन्दोलन में शामिल हो गए क्योकि वह असहयोग आन्दोलन वापस लेने के गाँधी के फेसले से नाखुश थे. वे हिंदुस्तान सोसलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन में भी शामिल हुए.

Movement By Sardar Bhagat Singh – सरदार भगत सिंह द्वारा चलाये गये आंदोलन

शहीद भगत सिंह ने 1927 से 1928 तक भारत में क्रांतिकारी आन्दोलन के इतिहास का अध्ययन करने में विताया. उनके लेख, जादातर क्रांति के लिखे गए, बब्बर अकाली आन्दोलन, काकोरी मामला दिल्ली बम प्रकरण, वव्यक्तिगत क्रांतिकारियों, युवा लोगो को आगे आने और क्रांतिकारी आन्दोलन में शामिल होने की आवश्यकता और मुख्यधारा के लिए एक विकल्प विकसित करने की आवश्यकता से निपटने के लिए. कांग्रेस का नेतृत्व  और विशेष रूप से लाला लाजपत राय.

सरदार भगत सिंह का आन्दोलनो में योगदान

शहीद भगत सिंह का जन्म एक राजनितिक रूप से जागरूक परिवार में हुआ था, जो गाँधी जी का अनुसरण करता था. शहीद भगत सिंह ने असहयोग आन्दोलन के एक भाग के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा प्राप्त पुस्तको को जला दिया और लाहौर के नेशनल कॉलेज में दाखिला लिया.

इसी प्रकार जलियांवालाबाग नरसंहार और 1921 में ननकाना साहिब में निहत्थे अकाली प्रद्शार्न्करियो की निमर्म हत्या ने उन्हें गहराई से हिला दिया. उन्होंने 1922 में चोरी चोरा की घटना के बाद गाँधी जी के अहिंसक द्रिस्तिकोण से खुद को दूर कर लिया और खुद को युवा क्रांतिकारी आन्दोलनों के साथ जोड़ लिया उन्होंने तब हिंसा को स्वतंत्रता के कारण नेतिक रूप से न्यायसंगत ठहराने की वकालत की.

Precious Thoughts of Sardar  Bhagat Singh – सरदार भगत सिंह के अनमोल विचार

Essay on Shahid Bhagat Singh In Hindi में अगर हम शहीद भगत सिंह के अनमोल विचारो के बारे मेंन बताये तोआप मान लीजियेगा कि आपका Essay पूरी तरह से अधुरा रह गया है. शहीद भगत सिंह तो बहुत ही अच्छे विचार धारा के थे. भारत में लोग आज भी शहीद विचार का अनुशरण करते है.

शहीद भगत सिंह द्वारा बोले गए अनमोल विचार कुछ इस प्रकार से है :-

  • मैं एक मानव हूँ और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है उससे मुझे फर्क पड़ता है.
  • मेरे जहन से निकलेगी न मरकर भी वतन की उल्फत, मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आएगी.
  • महान साम्राज्य नस्ट हो जाते है पर विचार अमर रहते है.
  • मेरा धर्म व कर्तब्य सिर्फ वतन की सेवा करना है.
  • कानून की सच्चाई तभी तक बनी रह सकती है जब तक की वो लोगो के अनुकूल अभिव्यक्ति करे.
  • जिन्दगी तो अपने दम पर ही जी जाती है. दुसरो के कंधे पर तोह सिर्फ अर्थियां उठाई जाती है.
  • प्रेम सदा मानव के चरित्र को ऊँचा करता है, प्रेम उसे कभी कम नही करता है, बशते प्यार प्यार हो.
  • अपने मुकदमे की सुनवाई के वक्त न्यायालय में विचार की भड़ास पत्थर पर क्रांति की तलवार तीव्र हो गई, आजादी के लिए भारत का संघर्ष.
  • आत्मनिभरता को सदा घमंड के रूप में व्याख्यायित किया जाता है | यह दुखद और दुखत है लेकिन कोई मदद नही है.
  • आलोचना और स्वतंत्र सोच एक क्रांति कारी के दो अप्रिहाया गुण है.

Essay On Bhagat Singh Conclusion In Hindi – सरदार भगत सिंह निबंध पर निष्कर्ष

बघात सिंह ने जीवित रहतेह ही नहीं बल्कि शहीद होने के बाद भी इस देश की नोजवानो में देशप्रेम की भावना का निर्माण किया. 23 वर्षीय नौजवान भगत सिंह ने जीते जी तथा मरने के बाद भी अपना सब कुछ देश के नाम कर दिया। उनकी जीवनी पढ़ते समय लोगों में जोश का उत्पन्न होना उनके साहस के चरम को दर्शाता है।

भगत सिंह के बहुत बड़े साहसी वीर महापुरुष थे जिन्होंने अपने अंतिम व्यान में बताया कि उन्होंने असेम्ब्ली में बम फेंका, और उन्होंने ऐसा क्यों किया यह सरेआम सबके समक्ष, लोगों के भीतर की ज्वाला को जगाने के लिए बताया।

Essay on Bhagat Singh In Hindi (300 Word) – शहीद भगत सिंह पर निबंध

सरदार भगत सिंह एक युवा भारतीय क्रांतिकारी थे जिन्हें “शहीद भगत सिंह” भी कहा जाता है. उन्हें भारतीय स्वंत्रता आन्दोलन के सबसे प्रभावशाली कर्न्तिकरियो में से एक माना जाता है अमर शहीदों में सरदार भगत सिंह का नाम सबसे प्रमुख रूप से लिया जाता है. इंक्लाव जिन्दावाद का उनका नारा ने युवाओ पर स्वंत्रता आन्दोलन के दौरान काफी प्रभाव डाला था.

भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 को पंजाब के लायलपुर जिले में बंगा गावं के एक सिख परिवार में हुआ था (जो अब पाकिस्तान में है) उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह था और माता का नाम विधावाती कौर था. उनके दादा का नाम अर्जुन सिंह, पिता किशन सिघ और चाचा अजीत सिंह और स्वर्ण सिंह सभी स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय थे.

1916 में शहीद भगत सिंह D.A.V स्कूल में अध्ययन करते हुए लाहौर में कुछ प्रसिद्ध राजनितिक नेताओ जैसे लाला लाजपत राय और रास बिहारी बोस के सम्पर्क में आय. उस समय शहीद भगत सिंह 9 साल के थे | यहाँ उनकी रास्ट्रीयता की भावना को काफी बल मिला. स्कूल की पढाई के साथ साथ वे क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लेने लगे थे.

13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में जलियांवाला बाग हत्याकांड का शहीद भगत सिंह पर गहरा असर हुआ और वे इस ब्रिटिश कुरता को सहन नही कर सके और शहीद भगत सिंह दुसरे दिन वहाँ जा कर खून से सनी मिट्टी ले आए थे. लाहौर के रास्ट्रीय कॉलेज से अध्ययन छोड़ने के बाद भगत सिंह ने भारत की स्वंत्रता के लिए नोजवान भारत सभा की स्थापना की.

1929 में भगत सिंह और उनके सहयोगियों ने मिलकर दिल्ली के केन्द्रीय विधान सभा में बम फेका और नारा लगाया :- “इंकलाब जिंदाबाद, अंग्रेज साम्राज्यवाद का नाश हो”. विस्फोट करने के बाद वे वहाँ से भागे नही वल्कि उन्होंने अपनी भागीदारी कबुलते हुए पुलिस को आत्मसमपर्ण कर दिया.

23 मार्च 1931  को भगत सिंह और उनके दो साथियों के साथ राजगुरु और सुखदेव को फांसी पर लटकाया गया था. जब भगत सिंह को मौत की सजा सुनाई गयी थी, उस समय वे सिर्फ 23 वर्ष के थे. इसके बाद भारत के लोगो ने भगत सिंह को शहीद-ए –आजम का नाम दिया. जिन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में अपनीजान का वलिदान हँसते-हँसते दे दिया था.

Essay on Bhagat Singh In Hindi – शहीद भगत सिंह पर 500 शब्दों का निबंध हिंदी में.

सरदार भगत सिंह का नाम अमर शहीदों में सबसे प्रमुख रूप से लिया जाता है. भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर, 1907 में हुआ था. पंजाब का जिला लायलपुर में बंगा गाव (जो अभी पाकिस्तान में है) के एक देशभक्त सिख परिवार में हुआ था, जिसका अनुकूल प्रभाव उन पर पड़ा था. उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विधावती कौर था.

यह एक सिख परिवार था जिसने आर्य समाज के विचार को अपना लिया था. उनके परिवार पर आर्य समाज व् मह्श्री दयानंद की विचारधारा का गहरा प्रभाव था. भगत सिंह के जन्म के समय उनके पिता सरदार किशन सिंह एव उनके दो चाचा “अजीत सिंह” तथा “स्वर्ण सिंह” अंग्रेजो के खिलाफ होने के बाद कारण जेल में बंद थे. जिस दिन भगत सिंह पैदा हुए उनके पिता एव चाचा को जेल से रिहा किया गया. इस शुभ घड़ी के अवसर पर भगतसिंह के घर में खुसी और भी बढ़ गई थी.

भगत सिंह के जन्म के बाद उनकी दादी ने उनका नाम “भागो वाला” रखा था. जिसका मतलब होता है “अच्छे भाग्य वाला”. बाद में उन्हें “भगत सिंह”कहा जाने लगा. वह 14 वर्ष की आयु से ही पंजाब की क्रांतिकारी संस्थाओ में कार्य करने लगे थे. D.A.V स्कूल से उन्होंने नोवी की परीक्षा उत्रिड की.

1923 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें विवाह बंधन में बांधने की तेयारियां होने लगी तो वह लाहौर से भागकर कानपूर आ गए. फिर देश की आजादी के संघर्ष में ऐसे रमे की पूरा जीवन ही देश को समर्पित कर दिया. भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए जिस साहस के साथ सक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुकाबला किया, वह युवको के लिए हमेशा ही एक बहुत बड़ा आदर्श बना रहेगा.

भगत सिंह को हिंदी, उर्दू, पंजाबी तथा अंग्रेजी के अलावा बंगला भी आती थी जो उन्होंने बटुकेश्वर दत्त से सीखी थी. जेल के दिनों में उनके लिखे खतो व् लेखो से उनके विचार का अंदाजा लगता है. उन्होंने भारतीय समाज में भाषा, जाती और धर्म के कारण आई दूरियों पर दुःख व्यक्त किया था.

उन्होंने समाज के कमजोर वर्ग पर किसी भारतीय के प्रहार को भी उसी सख्ती से सोचा जिंतना की किसी अंग्रेज के द्वारा किए गए अत्यचार को. उनका विश्वास था कि उनकी शहादत से भारतीय जनता और उग्र हो जाएगी, लेकिन जबतक वह जिन्दा रहेगे ऐसा नही हो पाएगा. इसी कारण उन्होंने मौत की सजा सुनोने के बाद भी माफीनामा लिखने से साफ मना कर दिया था.

अमृतसर में 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह की सोच पर इतना गहरा प्रभाव ढाला की लाहौर के नेशनल कॉलेज की पढाई छोड़कर भगत सिंह ने भारत की आजादी के लिए नोजवान भारत सभा की स्थापना की. काकोरी कांड में “रामप्रसाद विस्मिल” सहित 4 क्रांतिकारियों को फांसी हुयी.

व् 16 अन्य को कारावास की सजा से भगत सिंह इतने जयादा वेचेन हुए की चंद्रशेखर आजाद के साथ उनकी पार्टी हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़े गए और उसे एक नया नाम दिया ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन | इस संगठन का उद्देश्य सेवा त्याग और पीड़ा झेल सकने बाले नवयुवक तेयार करता था.

उपसंहार (Conclusion):-

भगत सिंह की शहादत से न केवल अपने देश के स्वतंत्रता संघर्ष को गति मिली बल्कि नवयुवकों के लिए भी वह प्रेरणा स्रोत बन गए। वह देश के समस्त शहीदों के सिरमौर बन गए. आज भी सारा देश उनके बलिदान को बड़ी गंभीरता व सम्मान से याद करता है।

Related Lecture

Dear Students, मैं आशा करता हूँ की आपको Essay On Bhagat Singh (सरदार भगत सिंह पर हिंदी में निबंध) को पढ़कर अच्छा लगा होगा. अब आप भी Essay On Bhagat Singh के बारे में लिख सकते है और लोगो को समझा सकते है. यदि आपको इस (Essay On Bhagat Singh) से related कोई भी समस्या (problem) है तो आप हमें comment करके पूछ सकते है.

Share This Post On

About Author

Thakur Aman Singh

Hey, I am Aman Singh Tomar from Taj City Agra. Through This Blog I want to share my Knowledge with all of you. Read More >>

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *