History of Chhatrapati Shivaji Maharaj in Hindi

History Of Chhatrapati Shivaji Maharaj In HindiDear Students, आज के इस Lecture में बात करेंगे Chhatrapati Shivaji Maharaj के बारे में यानि Chhatrapati Shivaji Maharaj कौन थे, Chhatrapati shivaji Maharaj का जन्म कब और कहां हुआ, छत्रपति शिवाजी महाराज का युद्ध किसके साथ हुआ, Chhatrapati shivaji Maharaj की मृत्यु कब और कैसे हुई इत्यादि के बारे में.

छत्रपति शिवाजी महाराज की इस पोस्ट में हम जानेंगे की Chhatrapati shivaji Maharaj का इतिहास क्या है, अदि से रिलेटेड  ये सारे Topic हम History of Chhatrapati shivaji Maharaj के Lecture में कवर करेगे. तो चलिये दोस्तों, जानते है की ये Chhatrapati shivaji Maharaj थे और उनका इतिहास क्या है.

Lectures Covering Topics – Chhatrapati Shivaji Maharaj In Hindi – छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास

  • History of Chhatrapati Shivaji Maharaj In Hindi – छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास
  • Who was Chhatrapati shivaji Maharaj In Hindi? –छत्रपति शिवाजी महाराज कौन थे?
  • When was Chhatrapati Shivaji Maharaj born in hindi? – छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म कब हुआ था?
  • Early Life of Chhatrapati shivaji Maharaj In Hindi- छत्रपति शिवाजी महाराज का प्रारम्भिक जीवन
  • छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने जीवन काल में कितने युद्ध लड़े?
  • When and with whom did Chhatrapati shivaji’s war take place?- छत्रपति शिवाजी महाराज का युद्ध कब और किसके साथ हुआ था?
  • छत्रपति शिवाजी महाराज का उत्तराधिकारी

Who was Chhatrapati shivaji Mahraj In Hindi छत्रपति शिवाजी महाराज कौन थे?

छत्रपती शिवाजी महाराज भारत के एक महान राजा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने 1674 ई. में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। छत्रपति शिवाजी महाराज ने औरंगजेब के खिलाफ बहुत बहुत संघर्ष किया छत्रपती शिवाजी महाराज ने अपनी अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों कि सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया।

 उन्होंने प्राचीन हिन्दू राजनीतिक प्रथाओं तथा दरबारी शिष्टाचारों को पुनर्जीवित किया और फारसी के स्थान पर मराठी एवं संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया।

भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में बहुत से लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवनचरित से प्रेरणा लेकर भारत की स्वतन्त्रता के लिये अपना तन, मन धन न्यौछावर कर दिया।

Early Life of Chhatrapati shivaji Maharaj In Hindi- छत्रपती शिवाजी का प्रारम्भिक जीवन

छत्रपती शिवाजी का जन्म दिन 20 Jan 1627 AD में  शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। छत्रपती शिवाजी के पिता का नाम शाहजी भोसले था और माता का नाम राजमाता जीजाबाई था|  उनका बचपन उनकी माता जिजाऊ माँ साहेब के मार्गदर्शन में बीता। छत्रपति शिवाजी महाराज का विवाह सन् 14 मई 1640 में सइबाई निंबाळकर के साथ लाल महल, पुणे में हुआ था।

छत्रपती शिवाजी की 8 पतिनिया थी. उस समय की मांग के अनुसार तथा सभी मराठा सरदारों को एक छत्र के नीचे लाने के लिए महाराज को 8 विवाह करने पडे़। छत्रपती शिवाजी की 8 पतिनिया नाम :-

सईबाई निम्बालकर – (बच्चे: संभाजी, सखुबाई, राणूबाई, अम्बिकाबाई); सोयराबाई मोहिते – (बच्चे- दीपबै, राजाराम); पुतळाबाई पालकर (1653-1680), गुणवन्ताबाई इंगले; सगुणाबाई शिर्के, काशीबाई जाधव, लक्ष्मीबाई विचारे, सकवारबाई गायकवाड़ – (कमलाबाई) (1656-1680)।

छत्रपती शिवाजी सभी कलाओं में माहिर थे, उन्होंने बचपन में राजनीति एवं युद्ध की शिक्षा ली थी। शिवाजी के बड़े भाई का नाम सम्भाजी था जो अधिकतर समय अपने पिता शाहजी भोसलें के साथ ही रहते थे। शाहजी राजे कि दूसरी पत्नी तुकाबाई मोहिते थीं। उनसे एक पुत्र हुआ जिसका नाम एकोजी राजे था।

छत्रपती शिवाजी माता जीजाबाई यादव कुल में उत्पन्न असाधारण प्रतिभाशाली महिला थी और उनके पिता एक शक्तिशाली सामंत थे। शिवाजी महाराज के चरित्र पर माता-पिता का बहुत प्रभाव पड़ा। बचपन से ही वे उस युग के वातावरण और घटनाओं को भली प्रकार समझने लगे थे।

The Attack of Chhatrapati Shivaji Maharaj – शिवाजी महाराज का आदिलशाही साम्राज्य पर आक्रमण

शिवाजी महाराज ने वर्ष 1645 में, आदिलशाह सेना को बिना सूचित किए कोंड़ना किला पर हमला कर दिया। इसके बाद आदिलशाह सेना ने शिवाजी के पिता शाहजी को गिरफ्तार कर लिया।

आदिलशाह सेना ने यह मांग रखी कि वह उनके पिता को तबरिहा करेगा जब वह कोंड़ना का किला छोड़ देंगे। उनके पिता की रिहाई के बाद 1645 में शाहजी की मृत्यु हो गई। पिता की मृत्यु के बाद शिवाजी ने फिर से आक्रमण करना शुरू कर दिया।

वर्ष 1659 में, आदिलशाह ने अपने सबसे बहादुर सेनापति अफज़ल खान को शिवाजी को मारने के लिए भेजा। शिवाजी और अफज़ल खान 10 नवम्बर 1659 को प्रतापगढ़ के किले के पास एक झोपड़ी में मिले।

दोनों के बीच एक शर्त रखी गई कि वह दोनों अपने साथ केवल एक ही तलवार लाए गए। शिवाजी को अफज़ल खान पर भरोसा नही था और इसलिए शिवाजी ने अपने कपड़ो के नीचे कवच डाला और अपनी दाई भुजा पर बाघ नख (Tiger’s Claw) रखा और अफज़ल खान से मिलने चले गए।

अफज़ल खान ने शिवाजी के ऊपर वार किया लेकिन अपने कवच की वजह से वह बच गए, और फिर शिवाजी ने अपने बाघ नख (Tiger’s Claw) से अफज़ल खान पर हमला कर दिया। हमला इतना घातक था कि अफज़ल खान बुरी तरह से घायल हो गया, और उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद शिवाजी के सैनिकों ने बीजापुर पर आक्रमण कर दिया।

शिवाजी ने 10 नवम्बर 1659 को प्रतापगढ़ के युद्ध में बीजापुर की सेना को हरा दिया। शिवाजी की सेना ने लगातार आक्रमण करना शुरू कर दिया। शिवाजी की सेना ने बीजापुर के 3000 सैनिक मार दिए, और अफज़ल खान के दो पुत्रों को गिरफ्तार कर लिया।

शिवाजी ने बड़ी संख्या में हथियारों ,घोड़ों,और दुसरे सैन्य सामानों को अपने अधीन कर लिया। इससे शिवाजी की सेना और ज्यादा मजबूत हो गई, और मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे मुगल साम्राज्य का सबसे बड़ा खतरा समझा।

मुगलों से पहली मुठभेड़ और History Of Chhatrapati Shivaji Maharaj In Hindi

मुग़ल के शासक औरंगजेब उत्तर भारत को अपने कब्जे में करना चाहता था लेकिन शिवजी को पहले से ही मालूम था कि औरंगजेब उत्तर भारत पर कब्ज़ा करना चाहता है |

औरंगजेब ने दक्षिण भारत में अपने मामा शाइस्ता खान को सूबेदार बना दिया था। शाइस्ता खान अपने 150,000 सैनिकों को लेकर पुणे पहुँच गया और उसने वहां लूटपाट शुरू कर दी।

शिवाजी ने अपने 350 मावलो के साथ उनपर हमला कर दिया था, तब शाइस्ता खान अपनी जान बचाकर भाग खड़ा हुआ और शाइस्ता खान को इस हमले में अपनी 3 उँगलियाँ गंवानी पड़ी।

इस हमले में शिवाजी महाराज ने शाइस्ता खान के पुत्र और उनके 40 सैनिकों का वध कर दिया। शाइस्ता खान ने पुणे से बाहर मुगल सेना के पास जा कर शरण ली और औरंगजेब ने शर्मिंदगी के मारे शाइस्ता खान को दक्षिण भारत से हटाकर बंगाल का सूबेदार बना दिया।

सूरत में लूट

शाईस्ता खान ने 6 साल अपनी 1,50,000 फ़ौज लेकर राजा शिवाजी का पुरा मुलुख जलाकर तबाह कर दिया था। इस लिए उस् का हर्जाना वसूल करने के लिये शिवाजी ने मुगल क्षेत्रों में लूटपाट मचाना आरम्भ किया। सूरत उस समय पश्चिमी व्यापारियों का गढ़ था और हिन्दुस्तानी मुसलमानों के लिए हज पर जाने का द्वार। शिवाजी ने चार हजार की सेना के साथ 1664 में छः दिनों तक सूरत के धनाड्य व्यापारियों को लूटा। आम आदमी को उन्होनें नहीं लूटा और फिर लौट गए।

आगरा में आमंत्रण और पलायन

शिवाजी को आगरा बुलाया गया जहाँ उन्हें लगा कि उन्हें उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। इसके विरोध में उन्होंने अपना रोश भरे दरबार में दिखाया और औरंगजेब पर विश्वासघात का आरोप लगाया। औरंगजेब इससे क्षुब्ध हुआ और उसने शिवाजी को नजरबन्द कर दिया और उनपर 5000 सैनिकों के पहरे लगा दिये।

कुछ ही दिनों बाद (18 अगस्त 1666 को) राजा शिवाजी को मार डालने का इरादा औरंगजेब का था। लेकिन अपने अदम्य साहस ओर युक्ति के साथ शिवाजी और सम्भाजी दोनों इससे भागने में सफल रहे[17 अगस्त 1666। सम्भाजी को मथुरा में एक विश्वासी ब्राह्मण के यहाँ छोड़ शिवाजी महाराज बनारस, गये पुरी होते हुए सकुशल राजगढ़ पहुँच गए [2 सितम्बर 1666]।

इससे मराठों को नवजीवन सा मिल गया। औरंगजेब ने जयसिंह पर शक करके उसकी हत्या विष देकर करवा डाली।

जसवंत सिंह के द्वारा पहल करने के बाद सन् 1668 में शिवाजी ने मुगलों के साथ दूसरी बार सन्धि की। औरंगजेब ने शिवाजी को राजा की मान्यता दी। शिवाजी के पुत्र शम्भाजी को 5000 की मनसबदारी मिली और शिवाजी को पूना, चाकन और सूपा का जिला लौटा दिया गया।

सिंहगढ़ और पुरन्दर पर मुग़लों का अधिपत्य बना रहा। सन् 1670 में सूरत नगर को दूसरी बार शिवाजी ने लूटा। नगर से 132 लाख की सम्पत्ति शिवाजी के हाथ लगी और लौटते वक्त उन्होंने मुगल सेना को सूरत के पास फिर से हराया।

छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु और उत्तराधिकारी

छत्रपति शिवाजी की मृत्यु  3 अप्रैल 1680 में हुई | उस समय शिवाजी के उत्तराधिकार संभाजी को मिले। शिवाजी के ज्येष्ठ पुत्र संभाजी थे और दूसरी पत्नी से राजाराम नाम एक दूसरा पुत्र था। उस समय छत्रपति शिवाजी के सहीद हो जानने के बाद औरंगजेब ने 5,00.000 सेना के साथ पुरे भारत राज्य पर कब्ज़ा करने की कोशिश की.

औरंगजेब ने दक्षिण में आते ही अदिल्शाही २ दिनो में और कुतुबशाही १ ही दिनो में खतम कर दी। पर राजा सम्भाजी के नेतृत्व में मराठाओ ने ९ साल युद्ध करते हुये अपनी स्वतन्त्रता बरकरा‍र रखी। औरंगजेब के पुत्र शहजादा अकबर ने औरंगजेब के ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया।

संभाजी ने उसको अपने यहाँ शरण दी। औरंगजेब ने अब फिर जोरदार तरीके से संभाजी के ख़िलाफ़ आक्रमण करना शुरु किया। उसने अन्ततः 1689 में संभाजी के बीवी के सगे भाई याने गणोजी शिर्के की मुखबरी से संभाजी को मुकरव खाँ द्वारा बन्दी बना लिया। औरंगजेब ने राजा संभाजी से बदसलूकी की और बुरा हाल कर के मार दिया।

अपनी राजा कि औरंगजेब द्वारा की गई बदसुलूकी द्वारा मारा हुआ देखकर पूरा मराठा स्वराज्य क्रोधित हुआ। उन्होने अपनी पुरी ताकत से राजाराम के नेतृत्व में मुगलों से संघर्ष जारी रखा। 1700 इस्वी में राजाराम की मृत्यु हो गई।

उसके बाद राजाराम की पत्नी ताराबाई 4 वर्षीय पुत्र शिवाजी द्वितीय की संरक्षिका बनकर राज करती रही। आखिरकार 25 साल मराठा स्वराज्य के युद्ध लड के थके हुये औरंगजेब की उसी छ्त्रपती शिवाजी के स्वराज्य में दफन हुये।

प्रमुख तिथियां और घटनाएं

  • 1594: शिवाजी महाराज के पिता शाहजी भोंसले का जन्म
  • 1596: माँ जीजाबाई का जन्म
  • 1630/2/19: शिवाजी महाराज का जन्म।
  • 1630: से 1631 तक महाराष्ट्र में अकाल
  • 14 मई 1640: शिवाजी महाराज और साईबाई का विवाह
  • 1646: शिवाजी महाराज ने पुणे के पास तोरण दुर्ग पर अधिकार कर लिया।
  • 1656: शिवाजी महाराज ने चन्द्रराव मोरे से जावली जीता।
  • 10 नवंबर, 1659: शिवाजी महाराज ने अफजल खान का वध किया।
  • 5 सितंबर, 1659: संभाजी का जन्म।
  • 1659: शिवाजी महाराज ने बीजापुर पर अधिकार कर लिया।
  • 6 से 10 जनवरी, 1664: शिवाजी महाराज ने सूरत पर धावा बोला और बहुत सारी धन-सम्पत्ति प्राप्त की।
  • 1665: शिवाजी महाराज ने औरंगजेब के साथ पुरन्धर शांति सन्धि पर हस्ताक्षर किया।
  • 1666: शिवाजी महाराज आगरा कारावास से भाग निकले।
  • 1667: औरंगजेब राजा शिवाजी महाराज के शीर्षक अनुदान। उन्होंने कहा कि कर लगाने का अधिकार प्राप्त है।
  • 1668: शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच शांति सन्धि
  • 1670: शिवाजी महाराज ने दूसरी बार सूरत पर धावा बोला।
  • 1674: शिवाजी महाराज ने रायगढ़ में ‘छत्रपति’की पदवी मिली और राज्याभिषेक करवाया. 18 जून को जीजाबाई की मृत्यु।
  • 1680: शिवाजी महाराज की मृत्यु।

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Dear Students, मैं आशा करता हूँ की आपको History of Chhatrapati Shivaji Maharaj In Hindi का Lecture पढ़ कर समझ में आ गया होगा. की Chhatrapati Shivaji Maharaj कौन थे. यदि आपको History of Chhatrapati Shivaji Maharaj In Hindi के Lecture से Related कोई भी Problem है तो आप हमे Comment करके पूछ सकते है.

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Thakur Aman Singh

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