History Of Prithviraj Chauhan in Hindi

prithviraj chouhan in hindiDear Students, आज के इस Lecture में बात करेंगे पृथ्वीराज चौहान (Prithviraj Chauhan) के बारे में यानि पृथ्वीराज चौहान कौन थे, पृथ्वीराज चौहान का जन्म कब और कहां हुआ, Prithviraj Chauhan का युद्ध किसके साथ हुआ, उनकी मृत्यु कब कैसे हुई| पृथ्वीराज चौहान का इतिहास क्या है, पृथ्वीराज चौहान से रिलेटेड  ये सारे Topic हम Prithviraj Chauhan के Lecture में कवर करेगे.

Lectures Covering Topics – History Of Prithviraj Chauhan In Hindi

  • Who was Prithviraj Chauhan? – पृथ्वीराज चौहान कौन थे?
  • Early Life of Prithviraj Chauhan? – पृथ्वीराज चौहान का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
  • When and with whom did Prithviraj Chauhan’s war take place?- पृथ्वीराज चौहान का युद्ध कब और किसके साथ हुआ था?
  • पृथ्वीराज चौहान के जीवन मृत्यु और कुछ खास बाते
  • मुहम्मद गौरी का आक्रमण और पृथ्वीराज की उदारता
  • पुथ्वीराज चौहान की अफ़ग़ानिस्तान में कब्र और उसकी मिटटी भारत लाना
  • पृथ्वीराज चौहान की हार और कैद

पृथ्वीराज चौहान कौन थे – Who was Prithviraj Chauhan In Hindi

पृथ्वीराज चौहान एक राजपूत राजा थे उनको भारत के इतिहास में उनको धरती पुत्र भी कहा जाता था| पृथ्वीराज चौहान चौहान वंश के आखरी युद्ध थे | उन्होंने मेहस 11 साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया था | लेकिन उन्होंने अपने पिता की मृत्यु के पश्चात दिल्ली और अजमेर के शासन संभाला | इसी के साथ उन्होंने अपने सासन को दूर दूर तक फैलाया|

Early Life of Prithviraj Chauhan In Hindi – पृथ्वीराज चौहान का प्रारम्भिक जीवन

पृथ्वी राज का जन्म 1149 में अजमेर हुआ था. उनके पिताजी का नाम राजा  सोमेश्वर चौहान और माँ का नाम कर्पूरी देवी था|

पृथ्वीराज चौहान बचपन से ही बहादुर और युद्ध की कला में बहुत ही अच्छे रहे थे और उन्होंने इसके साथ साथ शब्द भेदी बाण और कला भी सीखी थी|

जब पथ्वीराज चौहान जंगल में गए तो उनका सामना एक शेर से हुआ तब वह सिर्फ 12 साल के थे.उन्होंने बिना किसी सस्त्र के जंगली शेर को मार गिराया था

1179 में युद्ध में उनके पिता की मौत के बाद चौहान को उत्तराधिकारी घोषित किया गया | उन्होंने दो राजधानियों दिल्ली और अजमेर पर शाषन किया जो उनको उनके नानाजी अक्रपाल और तोमरा वंश के अंगपाल तृतीय ने सौंपी थी |

राजा होते हुए उन्होंने अपने साम्राज्य को विस्तार करने के लिए कई अभियान चलाये और एक बहादुर योद्धा के रूप में जाने जाने लगे | उनके मोहम्मद गौरी के साथ युद्ध की महिमा कनौज के राजा जयचंद की बेटी संयुक्ता के पास पहुच गयी |

शासन व्यवस्था

पृथ्वीराज की शासन व्यवस्था का वर्णन विभिन्न ग्रन्थों में प्राप्त होता है।

सेनापति

1. स्कन्द – ये गुजरात राज्य के नागर ब्राह्मण थे। वे सेनापति के साथ साथ साम्राज्य के दण्डनायक भी थे।

2. भुन्नेकम्मल्ल – कर्पूरदेवी के चाचा थे।

3. उदयराज

4. उदग – मेडता प्रदेश के सामन्त थे।

5. कतिया – वीकमपुर के मण्डलेश्वर थे।

6. गोविन्द – कुत्रचित् उल्लेख मिलता है कि, ये नरायन के द्वितीययुद्ध में मुहम्मद घोरी द्वारा मारे गए। परन्तु जम्मू से प्राप्त एक शिलालेख में उल्लिखित है कि, प्रदेश के नरसिंह नामक राजकुमार ने इनकी हत्या की थी।

7. गोपालसिंह चौहान – देदरवा-प्रान्त के सामन्त थे।

8. केमास दहिया

मन्त्री

1. पं. पद्मनाभ – इनकी अध्यक्षता में अन्य मन्त्री भी थे। पृथ्वीराज विजय महाकाव्य के लेखक जयानक, विद्यापति गौड, वाशीश्वर जनार्दन, विश्वरूप और रामभट्ट। रामभट्ट ही चन्दबरदायी नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने ही पृथ्वीराज रासो काव्य की रचना की थी।

2. प्रतापसिंह (इसने पृथ्वीराज के साथ द्रोह किया था। पृथ्वीराज को जब घोरी (ग़ोरी) द्वारा अन्धा किया गया था, तब प्रतापसिंह के साथ मिल कर पृथ्वीराज घोरी को बाण से मारना चाहते थे। परन्तु इस प्रतापसिंह ने घोरी को पृथ्वीराज की योजना बता दी।)

3. रामदेव

. सोमेश्वर

पृथ्वीराज चौहान और कन्नोज की राजकुमारी संयोगिता  (Prithviraj Chauhan and Sanyogita):

पृथ्वीराज चौहान और उनकी रानी संयोगिता का प्रेम आज भी राजस्थान के इतिहास मे अविस्मरणीय है . दोनों ही एक दूसरे से बिना मिले केवल चित्र देखकर एक दूसरे के प्यार मे मोहित हो चुके थे. वही संयोगिता के पिता जयचंद्र पृथ्वीराज के साथ ईर्ष्या भाव रखते थे, तो अपनी पुत्री का पृथ्वीराज चौहान से विवाह का विषय तो दूर दूर तक सोचने योग्य बात नहीं थी.

जयचंद्र केवल पृथ्वीराज को नीचा दिखाने का मौका ढूंढते रहते थे, यह मौका उन्हे अपनी पुत्री के स्व्यंवर मे मिला. राजा जयचंद्र ने अपनी पुत्री संयोगिता का स्व्यंवर आयोजित किया| इसके लिए उन्होने पूरे देश से राजाओ को आमत्रित किया, केवल पृथ्वीराज चौहान को छोड़कर.

पृथ्वीराज को नीचा दिखाने के उद्देश्य से उन्होने स्व्यंवर मे पृथ्वीराज की मूर्ति द्वारपाल के स्थान पर रखी. परंतु इसी स्व्यंवर मे पृथ्वीराज ने संयोगिता की इच्छा से उनका अपहरण भरी महफिल मे किया और उन्हे भगाकर अपनी रियासत ले आए. और दिल्ली आकार दोनों का पूरी विधि से विवाह संपन्न हुआ. इसके बाद राजा जयचंद और पृथ्वीराज के बीच दुश्मनी और भी बढ़ गयी.

पृथ्वीराज चौहान के जीवन कुछ खास बाते :-

जन्म 1149
मृत्यु 1192
पिता सोमेश्र्वर चौहान
माता कपूरी देवी
पत्नी संयोगिता
जीवन काल 43 वर्ष
पराजय मुहम्मद गौरी से

मुहम्मद गौरी का आक्रमण और पृथ्वीराज की उदारता Muhammad Gauri Attack

पृथ्वीराज और जयचंद दोनों के इस लड़ाई का फायदा उठाते हुए एक अफघानी घुसपैठिया मुहम्मद गौरी ने भारत में प्रवेश कर लिया और पंजाब में घजनाविद की सेना को पराजित कर दिया| मुहम्मद गौरी ने अब पृथ्वीराज के साम्राज्य तक अपने राज का विस्तार करने का निश्चय किया|मुहम्मद गौरी ने पूर्वी पंजाब के भटिंडा के किले की घेराबंदी कर ली जो कि पृथ्वीराज का सीमान्त प्रांत था|

हिन्दुओ ने हमेशा युद्ध के नियमो के अनुसार सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले दिन में लड़ाई का पालन किया लेकिन बुज्दिल मुस्लिम शाशकों ने सदैव रात्री को ही आक्रमण किया जब हिन्दू राजा और सैनिक उनके सैनिको के घावो का उपचार कर रहे होते है |

मुहम्मद गौरी ने भी रात को अचानक आक्रमण कर दिया और उसके मंत्रियों ने जयचंद से मदद की गुहार की लेकिन जयचंद ने इसका तिरस्कार करते हुए मदद करने से मना कर दिया. निडर पृथ्वीराज ने भटिंडा की तरफ अपनी सेना भेजी और 1191 में प्राचीन शहर थानेसर के निकट तराइन नामक जगह पर उसके शत्रुओ से सामना हुआ|

जिद्दी राजपूतो के आक्रमण की बदोलत पृथ्वीराज  ने विजय प्राप्त की और मुस्लिम सेना मुहम्मद गौरी को पृथ्वीराज के समक्ष छोडकर रण से भाग गयी| मुहम्मद गौरी को बेडियो में बांधकर पृथ्वीराज की राजधानी पिथोरगढ़ लाया गया और उसने पृथ्वीराज के समक्ष दया की भीख माँगी.

मुहम्मद गौरी ने घुटनों के बल बैठकर उसकी शक्ति की तुलना अल्लाह से करी. भारत के वैदिक नियमो के अनुसार पृथ्वीराज ने मुहम्मद गौरी को क्षमा कर दिया क्योंकि वो एक पड़ोसी राज्य का ना होकर एक विदेशी घुसपैठिया था. बहादुर राजपूत पृथ्वीराज  ने सम्मानपूर्वक मुहम्मद गौरी को रिहा कर दिया.

पृथ्वीराज चौहान की हार और कैद Prithviraj Chauhan Defeat

मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज   की उदारता का सम्मान ना करते हुए 1192 में फिर रात को पृथ्वीराज पर आक्रमण कर दिया | मुहम्मद गौरी ने 17वी बार अपनी पहले से मजबूत सेना के साथ मध्यांतर से पहले राजपूत सेना पर आक्रमण कर पृथ्वीराज को पराजित कर दिया | इस बार पराजित पृथ्वीराज को बेडियो में बांधकर अफ़ग़ानिस्तान लाया गया |

Prithviraj Chauhan की व्यथा यही पर खत्म नहीं हुयी | घोर में कैदी रहते हुए उसको घसीटते हुए मुहम्मद गौरी के दरबार में लाया गया और उसको मुस्लिम बनने के लिए प्रताड़ित किया गया | जब पृथ्वीराज को मुहम्मद गौरी  के समक्ष लाया गया तो वो गौरी की आंख में आँख मिलाकर घुर रहा था |

पृथ्वीराज  का ये कृत्य गौरी को बहुत अपमानित लगा और उसने पृथ्वीराज को आँखे नीची करने का आदेश दिया | पृथ्वीराज ने उसको कहा कि “आज मेरी वजह से ही तू जिन्दा है और एक राजपूत की आँखे मौत के बाद ही नीचे होती है ” पृथ्वीराज की ये बात सुनकर गौरी आग बबूला हो गया और उसने पृथ्वीराज की आँखे गर्म सलाखों से जला देने का आदेश दिया | पृथ्वीराज की आँखे फोड़ देने के बाद कई बार उसको गौरी के दरबार में लाकर प्रताड़ित किया जाता था और उसको भारत की संस्कृति को नकली बताकर उसे गालिया दी जाती थी |

उस समय पृथ्वीराज का पूर्व जीवनी लेखक चन्दवरदाई  उनके साथ था और उसने पृथ्वीराज की जीवन पर पृथ्वीराज रासो नाम की जीवन गाथा लिखी थी |चन्दवरदाई ने पृथ्वीराज को उनके साथ हुए अत्याचारों का बदला लेने को कहा |

उन दोनों को एक मौका मिला जब गौरी ने तीरंदाजी का खेल आयोजित किया | चन्दवरदाई की सलाह पर पृथ्वीराज ने गौरी से इस खेल में सामिलित होने की इच्छा जाहिर की | पृथ्वीराज की ये बात सुनकर गौरी के दरबारी खिक खिलाकर हंसने लगे कि एक अँधा कैसे तीरंदाजी में हिस्सा लेना चाहता है |

पृथ्वीराज ने मुहम्मद गौरी से कहा कि या तो वो उसे मार दे या फिर खेल में हिस्सा लेने दे. चन्दरवरदाई ने पृथ्वीराज की और से गौरी को कहा कि एक राजा होने के नाते वो एक राजा के आदेश की मान सकता है. मुहम्मद गौरी के जमीर को चोट लगी और वो राजी हो गया.

बताये हुए दिन गौरी अपने सिंहासन पर बैठा हुआ था और पृथ्वीराज को मैदान में लाया गया. पृथ्वीराज को उस समय पहली बार बेडियो से मुक्त किया गया. गौरी ने पृथ्वीराज को तीर चलाने का आदेश दिया और पृथ्वीराज ने गौरी की आवाज़ की दिशा में गौरी की तरफ तीर लगाया और गौरी उसी समय मर गया. इस दृश्य को चन्दरवरदाई ने बड़े सुंदर शब्दों में उल्लेख किया

पृथ्वीराज के अचानक हमले ने गौरी को मौत के घाट उतार दिया और दिल्ली पर सबसे ज्यादा समय तक राज करने वाले अंतिम हिन्दू शाषक को गौरी के मंत्रियों ने हत्या कर दी. उन्होंने पृथ्वीराज के शव को हिन्दू रीती रिवाजो के अनुसार क्रियाकर्म नही करने दिया और मुहम्मद गौरी की कब्र के नजदीक उनके शव को दफना दिया.

उन्होने पृथ्वीराज की कब्र पर थूकने और अपमानित करने की परम्परा नही छोड़ी जो आज भी वहा प्रचलित है. इस तरह एक महान हिन्दू शाशक का अंत हुआ और इसके बाद अगले 700 वर्ष तक भारत मुस्लिमो के अधीन रहा जब तक की ब्रिटिश सरकार नही आयी.

इसके बाद  कई हिन्दू राजा दिल्ली को मुस्लिमो से मुक्त कराने में लगे रहे जिसमे राणा अनंग पाल , राणा कुम्भा , राजा मलदेव राठोड , वीर दुर्गादास राठोड , राणा सांगा , राजा विक्रमादित्य, श्रीमंत विश्वास राय आदि ने मुस्लिम शाशको ने कई वर्षो तक सामना किया.

पुथ्वीराज चौहान की अफ़ग़ानिस्तान में कब्र और उसकी मिटटी भारत लाना – Prithviraj Chauhan Grave and Legacy

पृथ्वीराज को अफ़ग़ानिस्तान में दफनाया गया और कई बार उनकी कब्र को भारत लाने की याचिका की. अफ़ग़ानिस्तान में एक परम्परा के अनुसार गौरी की कब्र को देखने वाले लोग पहले चौहान की कब्र को चप्पलो से मारते है उस पर कूदते है और फिर गौरी की कब्र देखने को प्रवेश करते है.

तिहाड़ जेल में कैद फूलन देवी की हत्या करने वाले शेर सिंह राणा ने को जब इस बात का पता चला तो उसने एशिया की सबसे उच्चतम सुरक्षा वाली जेल से भागकर भारत के सम्मान को फिर से भारत में लाने के लिए गयेशेर सिंह राणा अपने राज की कब्र की खोज में अफ़ग़ानिस्तान निकल पड़ा लेकिन उसे कब्र की जगह के बारे में अनुमान कम था.

उसने तो केवल कब्र के अपमानित होने की बात सूनी थी. वो कांधार , काबुल और हेरत होता हुआ अंत में घजनी पहुच गया जहा पर मुहम्मद गौरी की कब्र का उसे पता चल गया. राणा को स्थानीय लोगो को पाकिस्तान का बताकर गौरी के कब्र को बहाल करने की बात कही. अपनी चालबाजी से उसने चौहान की कब्र को खोदकर मिटटी इक्कठी की और भारत लेकर आया. उसकी इस उपलब्धि को फोटो और वीडियो में भी रिकॉर्ड किया  गया.

2005 में राणा भारत आया और उसने  कुरियर से चौहान की अस्थिया इटावा में भेजी और स्थानीय नेताओ की मदद से एक उत्सव आयोजित किया. राणा की माँ सात्वती देवी मुख्य मेहमान थी और उन्होंने अपने बेटे को भारत का गर्व भारत लाने पर आशीर्वाद दिया.

भारतीय सरकार ने इसके बाद अफगानिस्तान में चौहान की कब्र को हटाने का आदेश दिया और इस महान सम्राट की सारी अस्थिया भारत को स्म्म्नापुर्वक सौंपने की बात कही. अफ़ग़ानिस्तान ने भारत की बात स्वीकार कर ली और वैदिक पूजा के साथ महान हिन्दू राज पृथ्वी राज चौहान का अंतिम संस्कार किया गया.

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Dear Students, मैं आशा करता हूँ की आपको History of Prithviraj Chauhan  In Hindi का Lecture पढ़ कर समझ में आ गया होगा. की पृथ्वीराज चौहान कौन थे? यदि आपको (History Of Prithviraj Chauhan In Hindi) के Lecture से Related कोई भी Problem है तो आप हमे Comment करके पूछ सकते है.

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Thakur Aman Singh

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3 responses to “History Of Prithviraj Chauhan in Hindi”

  1. ROHIT KUMAR says:

    आप हमेशा ही बहुत Good जानकारी शेयर करते है यह जानकारी मेरे लिए बहुत ही फायदेमंद है इसके लिए आपका बहुत बहुत आभार है भाई

  2. awesome likh likhte ho aap bhai aap hamare liye isi tarah se post likhte rahiye thanks for sharing

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